हिमालय के महान परम योगी महाराज, ब्रह्मलीन
हल्द्वानी 30 सितंबर- हिमालय के महान परम योगी श्री 1008 परमानंद पुरी जी महाराज की उम्र लगभग 138 वर्ष ने विगत दिवस राजलक्ष्मी फर्नीचर उद्योग हल्द्वानी में अपने भौतिक देह से लगभग 5 बजे शाम अंतिम सांस ली और इस खबर से भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई, रात भर भक्त उनके दर्शन के लिए आते रहे। आज प्रातः भक्तों द्वारा उनके ब्रह्मलीन शरीर को हल्द्वानी से वाया पदमपुरी होते हुए पलडा गौरा-शंकर गुफा तक भजन गाते हुए ले जाया गया और वहां उनकी देह को लोगों के दर्शन के उपरांत मानस खंड के महान संतों के मार्गदर्शन में संत परंपरा के अनुसार उनको समाधि में रखकर पंचतत्व में समर्पित किया। भक्तों के अपार जन समूह ने अपने सद्गुरु महाराज को नम आंखों से जयकारों के साथ अंतिम दर्शन कर भक्तों ने अपने हाथों से भूमि तत्व को अर्पित किया और उसके उपरांत भक्तों ने भंडारा ग्रहण किया।
ब्रह्मलीन परम योगी श्री 1008 परमानंद पुरी जी महाराज के शरीर का जन्म जम्मू एंड कश्मीर के जिला रामबन क्षेत्र में माना जाता है। उनकी शिक्षा भारत व इंग्लैंड ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेज कोलकाता के उपरांत ब्रितानी शासन कल में एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में असम, जोरहाट में तैनाती के बाद नौकरी से त्यागपत्र देकर, आप ने देवभूमि उत्तराखंड में ऋषिकेश आकर सन्यास ग्रहण किया और शेष जीवन को परम साधन में व्यतीत करते हुए बद्रीनाथ, केदारनाथ धाम व मथुरा से ज्ञानगंज आध्यात्मिक साधना का मुख्य केंद्र हिमालय की गुप्त रहस्यमय स्थान तिब्बत क्षेत्र में रहने के उपरांत शेष जीवन भक्तों के साथ व्यतीत किया। अपने आध्यात्मिक प्रभाव से हर वर्ष देश-विदेश से अनंत श्रद्धालु परम सत्य तक पहुंचाने का मर्म जानने के लिए आपके पास पहुंचते थे।
ब्रह्मलीन योगी महाराज भारत के जगतगुरु शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत दर्शन तथा क्रिया योग व अन्य योग विधाओं और कई भाषाओं के मर्मज्ञ माने जाते थे, इनके बारे में भक्तों का लेखन देश और विदेश के पुस्तक प्रकाशन में भी देखा गया है, ब्रह्मलीन परम योगी महाराज ने गुरुदेव के रूप में भारत के सूर्य विज्ञान साधक परमहंस स्वामी विशुद्धानंद सरस्वती जी महाराज, काशी के महान अद्वैत वेदांत विद्वान और श्रीमाॅ, शारदा देवी की कृपा पात्र थे और देवभूमि के महान विभूति में परम पूज्य संत श्री 1008 सोमवारी महाराज जी की तपोभूमि पदमपुरी तहसील धारी जिला नैनीताल जो पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री नारायण दत्त तिवारी के गृह क्षेत्र से भी जानी जाती है, वहां रहकर आपने कई वर्षों तक फलाहार ग्रहण कर ध्यान साधना करते हुए पलडा और हल्द्वानी में रहकर भक्तों से मिलते थे। आप उदार हृदय तथा वाणी से तीखे भी माने जाते हैं। अपने जीवन काल में भक्तों से किसी तरह मांगा नहीं करते थे और भक्तों ने जो दिया उसे सहज स्वीकार कर लेते थे, उनके आश्रम में अन्नपूर्णा का भंडार सदा भरा रहता था, अपने हाथों से प्रसाद बना कर भक्तों को खिलाते भी थे। आज भक्तगण उनकी महान अनुकंपा को अपने मन की गहराइयों से महसूस कर रहे हैं।